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निजी संस्थाएं नहीं सुधार सकतीं स्वास्थ्य सेवाएं : डॉ. सेनगुप्ता

81 Days ago

मध्यप्रदेश की राजधानी आए डॉ. सेनगुप्ता ने शुक्रवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की बजाय उन्हें सरकारें एनजीओ और निजी हाथों में सौंप रही हैं। इसके साथ ही औद्योगिक घराने भी इस क्षेत्र में अपना दखल बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में करुणा ट्रस्ट ने जब प्रवेश किया तो लगा कि स्थितियां सुधर रही हैं, मगर कुछ वर्षो बाद इस ट्रस्ट की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल भी वही हो गया, जैसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं हैं। अब मध्यप्रदेश में एक दीपक फाउंडेशन को स्वास्थ्य सेवाएं सौंपने का सिलसिला चल पड़ा है।

डॉ. सेनगुप्ता ने बताया कि मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य समिति ने दीपक फाउंडेशन से करार करके दो अस्पताल सौंप दिए है। दीपक फाउंडेशन का वार्षिक टर्नओवर 12 करोड़ रुपये है, इसमें से स्वास्थ्य सेवाओं में सिर्फ 27 प्रतिशत ही है। सवाल उठता है कि यह संस्था राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने आई है या फंडिंग एजेंसियों से अपना फंड बढ़ाने की जुगत लगाने आई है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सेनगुप्ता ने कहा कि जब सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं में एनजीओ और निजी भागीदारी बढ़ाती हैं तो उससे संबंधित क्षेत्र की जनता को कम, संस्था को ज्यादा लाभ होता है, क्योंकि उन्हें यह बताने का मौका मिल जाता है कि कई राज्य की सरकारें भी उन्हें काम सौंप रही हैं। इस आधार पर निजी कंपनियां देश और दुनिया की अनुदान देने वाली संस्थाओं से और ज्यादा अनुदान हासिल कर लेती हैं।

उन्होंने आगे कहा, "हम पहले एस्कोर्ट को सिर्फ टेक्टर कंपनी के तौर पर जानते थे, आज उसकी पहचान एक अस्पताल या यूं कहें स्वास्थ्य सेवा देने वाली संस्था के तौर पर भी हो गई है। इसी तरह की कई अन्य कंपनियां भी इस क्षेत्र में दाखिल हो रही है।"

उनका कहना है कि सरकारें जनकल्याण के लिए होती हैं, मगर औद्योगिक घरानें और व्यावसायिक संस्थाएं धन कमाने के लिए। ऐसे मंे जब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह संस्थाएं आएंगी तो सेवा करेंगी, यह संभव नहीं लगता है। यही कारण है कि गैस की बीमारी पर मरीज के हृदय का ऑपरेशन कर दिया जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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